मैकेनिकल इंजीनियर की डिग्री में हमें 40 से 50 सब्जेक्ट पढ़ाए जाते हैं। आज हम उनमें से जो मेन सब्जेक्ट हैं उनके बारे में जानेंगे कि वह मैकेनिकल से कैसे जुड़े हुए हैं और उनका पढ़ने का क्या फायदा है..
1. Engineering Mathematics
मैकेनिकल इंजीनियरिंग सारी की सारी कैलकुलेशन और फॉर्मूला पर टिकी हुई है। अगर आप की कैलकुलेशन उतनी अच्छी नहीं है तो आपके लिए यह मुश्किल हो सकती है। इसीलिए इसमें इंजीनियरिंग मैथमेटिक्स पढ़ाई जाती है, जिसमें बेसिक फॉर्मूला कैलकुलेशन, इंटीग्रेशन, डिफरेंटशिएशन, लेपलस, और कई तरह की सीरीज पढ़ाई जाती हैं जोकि मैकेनिकल इंजीनियरिंग के न्यूमेरिकल की कैलकुलेशन में काफी मदद करती हैं।
2. Strength of Materials...
इस सब्जेक्ट में अलग-अलग तरह के मेटेरियल की मजबूती को अलग-अलग तरह के तरीकों से टेस्ट किया जाता है। इसमें अलग अलग तरह से मैटेरियल्स को ब्रेक किया जाता है, और उनका फैलियर पॉइंट नोट किया जाता है। जिससे उन से बनी चीजें को यूज में लाते समय हमें पता चले कि इसकी क्षमता कितनी है। यह सब्जेक्ट सारा का सारा कैलकुलेशन बेस है। इसको मैकेनिकल का सबसे मुश्किल सब्जेक्ट भी माना जाता है।
3. Theory of Machines..
यह सब्जेक्ट मशीनों की फंक्शनिंग से जुड़ा हुआ है। इसमें मशीनों के मूवमेंट को कैलकुलेट किया जाता है जिससे उनकी रिलायबिलिटी और ड्युरेबिलिटी का अंदाजा लग जाता है। इसमें 2 भाग होते हैं पहले भाग में मशीनें रुकी होती हैं या नहीं मूवमेंट में नहीं होती। दूसरे भाग में मशीनें मोमेंट में होती है यानी उनकी कुछ गति होती है और उस गति पर मशीन किस तरह से काम कर रही है यह चीजें चेक की जाती है।
4. Machine Design...
इसमें अलग-अलग मशीनों को डिजाइन किया जाता है और उनका फैलियर प्वाइंट कैलकुलेट किया जाता है। ताकि हम सेफ्टी फैक्टर को निकाल सकें। इसका मैन परपज यही है कि कोई मशीन किस लिमिट तक काम कर सकती है ताकि कोई भी दुर्घटना होने से बच सकें।
6. Fluid Mechanics...
इस सब्जेक्ट में अलग-अलग फ्लुइड की कैपेसिटी को टेस्ट किया जाता है, ताकि हम उसकी एनर्जी को मैकेनिकल एनर्जी में कन्वर्ट कर सकें और उससे ज्यादा से ज्यादा काम ले सकते हैं। अलग अलग लिक्विड को अलग अलग तरीके से टेस्ट करने के बाद जहां उसका रिजल्ट मैक्सिमम होता है उसे काम में लिया जाता है। इसका मेन मकसद एफिशिएंसी को बढ़ाना है ताकि हमें ज्यादा से ज्यादा कlआउटपुट मिल सके।
7. Heat Transfer...
मैकेनिकल एनर्जी को काम में लाते समय सबसे बड़ी दिक्कत यह होती है की मशीनें गर्म होने लगती हैं। ऐसा एनर्जी के लॉस की वजह से होता है क्योंकि एनर्जी पूरी तरह मैकेनिकल एनर्जी में कन्वर्ट नहीं हो पाती। इस समस्या से निपटने के लिए हिंटिंग ट्रांसफर सब्जेक्ट पढ़ाया जाता है। जिसमें हमें समय के साथ साथ हीट के ट्रांसफर होने का पता चल जाए ताकि हम मशीन को तय समय तक ही यूज करें और उसके बाद उसको बंद कर दें जब तक उसका टेंपरेचर नॉर्मल ना हो जाए।
8. Thermodynamics...
इस सब्जेक्ट में पढ़ाया जाता है किस तरह कोई भी एनर्जी मैकेनिकल एनर्जी में कन्वर्ट होती है। हम एनर्जी को क्रिएट नहीं कर सकते यह एक फोम से दूसरे फोम में ट्रांसफर होती है। यह सब्जेक्ट सारा का सारा आइडियल एसम्प्शन पर टीका है बाद में उसमें से लॉस निकल जाते हैं और एफिशिएंसी को कैलकुलेट कर लिया जाता है।
9. Refrigeration and Air conditioning...
इस सब्जेक्ट का मेन मकसद कूलिंग इफेक्ट को क्रिएट करना है। इसमें यह भी बताया जाता है कि किस तरह रेफ्रिजरेटर की कूलिंग और एयर कंडीशनिंग की कूलिंग अलग अलग है। और किस तरह हम हीट को यूज करके कूलिंग इफेक्ट जनरेट कर सकते हैं।
10. Manufacturing process...
इस सब्जेक्ट में किसी भी प्रोडक्ट की उसकी शुरुआत से लेकर अंतिम तक की जर्नी को दिखाया जाता है। इसमें दिखाया जाता है कि किस तरह हम कच्चे माल से फिनिश्ड प्रोडक्ट को बना सकते हैं। इसमें बहुत सारी कैटिगरीज होती है यह मैकेनिकल का प्रैक्टिकल सब्जेक्ट है। आप लोगों ने जहां भी मशीनों का काम होते हुए देखा है तो समझ लीजिए आप मैन्युफैक्चरिंग प्रोसेस को देख रहे हैं।
इसके अलावा भी मैकेनिकल इंजीनियरिंग में ढेर सारे सब्जेक्ट पढ़ाए जाते हैं और हर सब्जेक्ट उतना ही जरूरी है।
यह कुछ बेसिक सब्जेक्ट थे अगर आप भी किसी सब्जेक्ट के बारे में जानकारी देना चाहते हैं तो नीचे कमेंट में जरूर बताएं और आप मैकेनिकल इंजीनियरिंग से जुड़ी हुई किसी भी समस्या या कोई भी सवाल पूछना चाहते हैं तो कमेंट बॉक्स में पहुंच सकते हैं।
देश कुमार
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